एक रात हसीं ख्वाब के साथ
सन्नाटा था चारों तरफ,
नदी मे तारों का पहरा था,
एक तरफ नदी की आवाज़ थी,
तो दूसरी तरफ चाँद का हसीन चेहरा था
तारों से ढका आसमान ,
अँधेरे में भी उजाला भर रहा था,
वो रात में फूलों का महकना
अंधकार को भी मोहित कर रहा था
रात में नदी किनारे बैठना,
खुद से यूँ ही बाते करते रहना,
उस सन्नाटे में कल के सपने सजाना,
बस यही चाहता है मन यही सब करते रहना
खुद से यूँ ही बाते करते रहना,
उस सन्नाटे में कल के सपने सजाना,
बस यही चाहता है मन यही सब करते रहना
रात के इस सफर में,
कुछ अलग सा ही मजा था,
बचपन से ये चाह थी,
इस सफर मे खो जाना बस यही एक सपना था
-Harsh Sharma

